57,83,219 में अंक 7 का स्थानीय मान क्या है?
- A. 7,000
- B. 70,000
- C. 7,00,000
- D. 70,00,000
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Correct option: C — 7,00,000
भारतीय पद्धति में दाएँ से बाएँ 7 लाख के स्थान पर है, इसलिए स्थानीय मान 7 × 1,00,000 = 7,00,000 है।
Class 6 · Mathematics
Numbers, fractions, decimals, algebra, mensuration and geometry. Total 80 questions: 40 MCQ, 25 short, 15 long.
Correct option: C — 7,00,000
भारतीय पद्धति में दाएँ से बाएँ 7 लाख के स्थान पर है, इसलिए स्थानीय मान 7 × 1,00,000 = 7,00,000 है।
Correct option: A — 85320
सबसे बड़ी संख्या के लिए अंकों को घटते क्रम में लिखते हैं: 8, 5, 3, 2, 0 अर्थात् 85320।
Correct option: B — 4,700
दहाई व इकाई 72 हैं, जो 50 से बड़े हैं, अतः सौ का अंक 6 से बढ़कर 7 हो जाता है। उत्तर 4,700 है।
Correct option: B — 2000
उत्तरवर्ती निकालने के लिए संख्या में 1 जोड़ते हैं: 1999 + 1 = 2000।
Correct option: B — 0
पूर्ण संख्याएँ 0, 1, 2, 3, ... होती हैं। इनमें सबसे छोटी संख्या 0 है।
Correct option: B — क्रमविनिमेय गुण
गुणन में क्रम बदलने पर गुणनफल नहीं बदलता, यह क्रमविनिमेय गुण है।
Correct option: C — 29
29 के केवल दो गुणनखंड 1 और 29 हैं। 15 = 3 × 5, 21 = 3 × 7, 35 = 5 × 7 भाज्य हैं।
Correct option: B — 6
12 = 2 × 2 × 3 तथा 18 = 2 × 3 × 3। उभयनिष्ठ गुणनखंड 2 × 3 = 6 हैं।
Correct option: B — 12
4 = 2 × 2 तथा 6 = 2 × 3। ल.स. = 2 × 2 × 3 = 12।
Correct option: C — 246
अंकों का योग 2 + 4 + 6 = 12, जो 3 से विभाज्य है। अतः 246, 3 से विभाज्य है।
Correct option: B — 2
रेखाखंड दोनों ओर बंद होता है, इसलिए उसके ठीक दो अंत्य बिंदु होते हैं।
Correct option: C — संगामी रेखाएँ
एक ही बिंदु से होकर जाने वाली तीन या अधिक रेखाएँ संगामी रेखाएँ कहलाती हैं।
Correct option: B — 90°
समकोण ठीक 90° का होता है। 45° न्यूनकोण और 180° सरल कोण है।
Correct option: B — 6
घन के 6 फलक, 12 किनारे और 8 शीर्ष होते हैं।
Correct option: C — समबाहु
तीनों भुजाएँ समान हों तो त्रिभुज समबाहु होता है।
Correct option: D — -3
संख्या रेखा पर -8 से 5 इकाई दाईं ओर जाने पर -3 आता है।
Correct option: B — -16
पूर्ववर्ती के लिए 1 घटाते हैं: -15 - 1 = -16।
Correct option: B — 12
निरपेक्ष मान हमेशा अऋणात्मक होता है, अतः |-12| = 12।
Correct option: C — 3/4
1/2 = 2/4, अतः 2/4 + 1/4 = 3/4।
Correct option: B — 12
(3/5) × 20 = 60/5 = 12।
Correct option: B — 4/6
2/3 के अंश-हर को 2 से गुणा करने पर 4/6 मिलता है, जो तुल्य है।
Correct option: C — 0.75
0.50 + 0.25 = 0.75।
Correct option: B — 7/10
0.7 में 7 दसवें स्थान पर है, अतः 7/10।
Correct option: B — 0.6
दशमलव के बाद पहला स्थान दसवाँ है, अतः 6 का मान 6/10 = 0.6 है।
Correct option: C — 40
4 × 10 = 40 विद्यार्थी।
Correct option: C — 20
4 × 5 = 20 विद्यार्थी।
Correct option: B — 26 सेमी
परिमाप = 2 × (8 + 5) = 2 × 13 = 26 सेमी।
Correct option: C — 81 सेमी²
क्षेत्रफल = भुजा × भुजा = 9 × 9 = 81 सेमी²।
Correct option: B — 18 सेमी
परिमाप = 3 × 6 = 18 सेमी।
Correct option: C — 84 सेमी²
क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई = 12 × 7 = 84 सेमी²।
Correct option: B — 8
दोनों ओर से 7 घटाने पर x = 15 - 7 = 8।
Correct option: A — 4
दोनों ओर 5 से भाग देने पर y = 20 ÷ 5 = 4।
Correct option: A — 3x + 2
3x + 2 में चर x है, अतः यह बीजीय व्यंजक है। शेष केवल संख्याएँ हैं।
Correct option: B — 2 : 3
12 और 18 को 6 से भाग देने पर 2 : 3 मिलता है।
Correct option: B — 12
गुणनफलों की समानता: 3 × x = 4 × 9 ⇒ 3x = 36 ⇒ x = 12।
Correct option: B — ₹8
एकक विधि: 40 ÷ 5 = ₹8।
Correct option: D — 4
वर्ग की दो विकर्ण और दो मध्य रेखाएँ — कुल 4 सममिति रेखाएँ होती हैं।
Correct option: C — 3
प्रत्येक शीर्ष से विपरीत भुजा के मध्यबिंदु तक एक रेखा, कुल 3 सममिति रेखाएँ।
Correct option: B — पैमाना और परकार
पैमाने से लंबाई नापते हैं और परकार से समान लंबाई स्थानांतरित करते हैं।
Correct option: C — त्रिज्या
केंद्र से परिधि तक की दूरी त्रिज्या होती है। व्यास = 2 × त्रिज्या।
भारतीय पद्धति में अंकों को एक, दस, सौ, हजार, लाख और करोड़ के समूह में पढ़ा जाता है। अंतरराष्ट्रीय पद्धति में हजार के बाद मिलियन और बिलियन आते हैं। उदाहरण: 10,00,000 भारतीय में 10 लाख और अंतरराष्ट्रीय में 1 मिलियन कहलाता है। बड़ी संख्याएँ लिखते समय अल्पविराम भी इन्हीं स्थानों पर लगते हैं।
अंकित मान अंक का अपना चेहरा-मान होता है, जो स्थान बदलने पर नहीं बदलता। स्थानीय मान = अंकित मान × स्थान का मान। उदाहरण: 4,582 में 5 का अंकित मान 5 है, पर स्थानीय मान 500 है क्योंकि वह सैकड़े के स्थान पर है।
पूर्ण संख्याएँ 0, 1, 2, 3, 4 इत्यादि का समूह हैं। इनमें भिन्न या ऋणात्मक संख्याएँ नहीं आतीं। सबसे छोटी पूर्ण संख्या 0 है। 0 का पूर्ववर्ती इस समूह में नहीं होता।
योग का तत्समक अवयव 0 है, क्योंकि किसी पूर्ण संख्या में 0 जोड़ने से संख्या नहीं बदलती। उदाहरण: 17 + 0 = 17 तथा 0 + 17 = 17। गुणन का तत्समक अवयव 1 होता है, जैसे 17 × 1 = 17।
अभाज्य संख्या के केवल दो गुणनखंड होते हैं — 1 और स्वयं वह संख्या। भाज्य संख्या के दो से अधिक गुणनखंड होते हैं। 2, 3, 5, 7, 11 अभाज्य हैं, जबकि 4, 6, 8, 9, 15 भाज्य हैं। 1 न अभाज्य है न भाज्य।
24 = 1 × 24, 2 × 12, 3 × 8, 4 × 6, अतः गुणनखंड 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12, 24 हैं। 2 के केवल दो गुणनखंड 1 और 2 हैं, इसलिए 2 अभाज्य है। 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या भी है।
बिंदु स्थिति बताता है, उसकी कोई लंबाई-चौड़ाई नहीं होती। रेखाखंड के दो अंत्य बिंदु होते हैं, जैसे AB। किरण का एक प्रारंभिक बिंदु होता है और वह दूसरी ओर अनंत तक जाती है, जैसे किरण OA।
समांतर रेखाएँ एक ही तल में होती हैं और कभी नहीं मिलतीं, जैसे रेल की पटरियाँ। प्रतिच्छेदी रेखाएँ एक बिंदु पर काटती हैं। दो भिन्न रेखाएँ या तो समांतर होती हैं या एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं।
न्यूनकोण 0° से बड़ा और 90° से छोटा होता है। समकोण ठीक 90° का होता है। अधिककोण 90° से बड़ा और 180° से छोटा होता है। सरल कोण 180° तथा पूर्ण कोण 360° का होता है।
घन के सभी फलक वर्ग होते हैं और सभी किनारे बराबर होते हैं। घनाभ के फलक आयत होते हैं; लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई अलग-अलग हो सकती हैं। दोनों के 6 फलक, 12 किनारे और 8 शीर्ष होते हैं।
पूर्णांक धनात्मक संख्याएँ, ऋणात्मक संख्याएँ और 0 का समूह हैं: ..., -2, -1, 0, 1, 2, ...। संख्या रेखा पर 0 के दाईं ओर धनात्मक और बाईं ओर ऋणात्मक पूर्णांक होते हैं। 4 को 0 से 4 इकाई दाईं ओर तथा -3 को 0 से 3 इकाई बाईं ओर अंकित करते हैं।
संख्या रेखा पर -7 से 12 इकाई दाईं ओर जाने पर 5 आता है, अतः (-7) + 12 = 5। 9 से 4 इकाई बाईं ओर जाने पर 5 आता है, अतः 9 + (-4) = 5। भिन्न चिह्न वाले पूर्णांकों का योग उनके अंतर के बराबर होता है और चिह्न बड़े निरपेक्ष मान वाला रहता है।
उचित भिन्न में अंश हर से छोटा होता है, जैसे 3/8। अनुचित भिन्न में अंश हर के बराबर या बड़ा होता है, जैसे 9/4 या 5/5। मिश्रित भिन्न पूर्ण संख्या और उचित भिन्न का योग है, जैसे 2 1/3। 9/4 = 2 1/4 मिश्रित रूप है।
2/3 = 4/6, अतः 4/6 + 1/6 = 5/6। जिन भिन्नों के हर समान हों, वे समभिन्न कहलाती हैं, जैसे 4/6 और 1/6। हर अलग हों तो उन्हें पहले समहर बनाकर जोड़ा जाता है।
0.25 = 25/100। 25 और 100 को 25 से भाग देने पर 1/4 मिलता है। दशमलव बिंदु एकों और दसवें स्थान को अलग करता है। दसवाँ, सौवाँ, हजारवाँ स्थान बिंदु के दाईं ओर आते हैं।
3.42 बड़ी है क्योंकि पूर्ण भाग 3 समान है, पर दसवें स्थान पर 4 > 2 है। तुलना में पहले पूर्ण भाग, फिर दसवाँ, फिर सौवाँ स्थान देखते हैं। स्थान रिक्त हो तो 0 मान लेते हैं, जैसे 3.4 = 3.40।
चित्रालेख में आँकड़ों को चित्र-चिह्नों से दर्शाते हैं। प्रत्येक चिह्न एक निश्चित संख्या बताता है, जिसे पैमाना कहते हैं। पैमाना बिना चित्रालेख पढ़ा नहीं जा सकता। उदाहरण: 1 फूल = 10 पौधे हो तो 3 फूल = 30 पौधे।
परिमाप आकृति की सीमा की कुल लंबाई है, इसकी इकाई सेमी या मीटर होती है। क्षेत्रफल वह माप है जो आकृति भीतर कितना तल ढकती है, इकाई सेमी² या मीटर² है। आयत का परिमाप 2(ल + चौ) तथा क्षेत्रफल ल × चौ होता है।
परिमाप = 2 × (10 + 6) = 2 × 16 = 32 सेमी। क्षेत्रफल = 10 × 6 = 60 सेमी²। परिमाप सीमा नापता है और क्षेत्रफल भीतर की सतह नापता है, इसलिए इकाइयाँ अलग हैं।
चर वह प्रतीक है जिसका मान बदल सकता है, जैसे x, y, n। अचर वह संख्या है जिसका मान स्थिर रहता है, जैसे 2, 7, 15। व्यंजक 4x + 9 में x चर है और 4 तथा 9 अचर हैं।
दोनों ओर से 5 घटाने पर 3n = 15। दोनों ओर 3 से भाग देने पर n = 5। जाँच: 3 × 5 + 5 = 15 + 5 = 20, जो दिया गया मान है।
अनुपात दो राशियों की तुलना भाग द्वारा करता है, जैसे 2 : 3। समानुपात दो अनुपातों की समानता है, जैसे 2 : 3 = 4 : 6। समानुपात में क्रॉस-गुणनफल बराबर होते हैं: 2 × 6 = 3 × 4 = 12।
1 किग्रा का मूल्य = 120 ÷ 4 = ₹30। अतः 7 किग्रा का मूल्य = 30 × 7 = ₹210। एकक विधि में पहले एक इकाई का मान निकालकर फिर आवश्यक इकाइयाँ गुणा करते हैं।
यदि किसी आकृति को एक रेखा से दो भागों में बाँटने पर दोनों भाग एक-दूसरे पर ठीक बैठ जाएँ, तो वह रेखा सममिति रेखा है। वर्ग की 4 सममिति रेखाएँ होती हैं — दो विकर्ण और भुजाओं के मध्य बिंदुओं को मिलाने वाली दो रेखाएँ। आयत की केवल 2 सममिति रेखाएँ होती हैं।
पहले दी गई लंबाई को परकार के दोनों नोकों के बीच सेट करते हैं। फिर एक किरण खींचकर प्रारंभिक बिंदु पर परकार का एक सिरा रखकर चाप काटते हैं। चाप और किरण का प्रतिच्छेद बिंदु दूसरा अंत्य बिंदु होता है। इस प्रकार नए रेखाखंड की लंबाई मूल के बराबर रहती है।
कक्षा 6 में बड़ी संख्याओं को सही पढ़ना और लिखना पहली कुशलता है। भारतीय पद्धति में अंकों को दाएँ से बाएँ एक, दस, सौ, हजार, दस हजार, लाख, दस लाख और करोड़ के स्थान पर रखते हैं। किसी अंक का अंकित मान उसके चेहरे के बराबर रहता है, पर स्थानीय मान स्थान पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए 45,678 में 5 हजार के स्थान पर है, अतः स्थानीय मान 5,000 है जबकि अंकित मान केवल 5 है। बड़ी संख्याओं की तुलना में पहले अंकों की गिनती देखते हैं; अंक समान हों तो बाएँ से दाएँ तुलना करते हैं। पूर्णांकन से संख्या सरल बनती है। 3,462 को निकटतम सौ पर पूर्णांकित करने पर 3,500 मिलता है क्योंकि 62, पचास से बड़ा है। जनसंख्या, दूरी और धन की रोज़मर्रा की गणना में ये नियम काम आते हैं।
पूर्ण संख्याएँ 0, 1, 2, 3 से आगे बढ़ती हैं और इनमें सबसे छोटी संख्या शून्य है। योग तथा गुणन का परिणाम हमेशा पूर्ण संख्या रहता है, पर घटाने और भाग देने पर ऐसा जरूरी नहीं। क्रमविनिमेय गुण कहता है कि क्रम बदलने से योग या गुणन नहीं बदलता: 8 + 5 = 5 + 8 और 6 × 7 = 7 × 6। साहचर्य गुण तीन संख्याओं पर लागू होता है: (2 + 3) + 4 = 2 + (3 + 4)। शून्य योग का तत्समक है क्योंकि 19 + 0 = 19। एक गुणन का तत्समक है क्योंकि 19 × 1 = 19। वितरण गुण है: 5 × (4 + 6) = 5 × 4 + 5 × 6 = 20 + 30 = 50। शून्य का पूर्ववर्ती पूर्ण संख्याओं में नहीं होता। ये गुण बाद के बीजगणित की नींव हैं।
प्रत्येक प्राकृत संख्या 1 से बड़ी या तो अभाज्य होती है या भाज्य। अभाज्य के केवल दो गुणनखंड होते हैं, जैसे 2, 3, 5, 7, 11। 2 एकमात्र सम अभाज्य है। भाज्य संख्या के दो से अधिक गुणनखंड होते हैं। 1 न अभाज्य है न भाज्य। 36 = 2 × 2 × 3 × 3 अभाज्य गुणनखंड हैं। दो संख्याओं का म.स. वह सबसे बड़ी संख्या है जो दोनों को विभाजित करे। 12 = 2 × 2 × 3 और 18 = 2 × 3 × 3, अतः म.स. = 2 × 3 = 6। ल.स. वह सबसे छोटी संख्या है जो दोनों की गुणज हो: 2 × 2 × 3 × 3 = 36। अंतिम अंक सम हो तो संख्या 2 से विभाज्य है। अंकों का योग 3 से विभाज्य हो तो संख्या 3 से विभाज्य है, जैसे 246 में 2 + 4 + 6 = 12।
ज्यामिति आकृतियों और उनकी स्थिति का अध्ययन है। बिंदु स्थान बताता है, उसकी लंबाई नहीं होती। सरल रेखा दोनों ओर अनंत तक जाती है। रेखाखंड दो बिंदुओं के बीच का निश्चित भाग है, जैसे PQ, इसकी माप निकाली जा सकती है। किरण का एक प्रारंभिक बिंदु होता है और दूसरी दिशा अनंत होती है। दो किरणें एक ही बिंदु से निकलें तो कोण बनता है। तीन या अधिक बिंदु एक सरल रेखा पर हों तो संरेख कहलाते हैं। तीन या अधिक रेखाएँ एक ही बिंदु से गुजरें तो संगामी होती हैं। एक तल में कभी न मिलने वाली रेखाएँ समांतर हैं। दो रेखाएँ एक बिंदु पर काटें तो प्रतिच्छेदी हैं। वृत्त के सभी बिंदु केंद्र से समान दूरी पर होते हैं।
कोण को चाँदे से मापते हैं। न्यूनकोण 90 डिग्री से छोटा, समकोण ठीक 90 डिग्री, अधिककोण 90 से बड़ा और 180 से छोटा होता है। सरल कोण 180 डिग्री तथा पूर्ण कोण 360 डिग्री का होता है। त्रिभुज भुजाओं के अनुसार समबाहु, समद्विबाहु और विषमबाहु होते हैं। वर्ग की चार भुजाएँ और चार समकोण बराबर होते हैं। आयत के आमने-सामने की भुजाएँ बराबर और कोण समकोण होते हैं। घन के छह वर्ग फलक, बारह किनारे और आठ शीर्ष होते हैं। घनाभ के फलक आयत होते हैं। बेलन के दो वृत्ताकार फलक होते हैं। शंकु का एक वृत्ताकार आधार और एक शीर्ष होता है। गोले का कोई फलक नहीं, केवल वक्र पृष्ठ है।
पूर्णांक धनात्मक संख्याएँ, ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य मिलाकर बनते हैं। संख्या रेखा पर शून्य केंद्र है, दाईं ओर 1, 2, 3 और बाईं ओर -1, -2, -3 आते हैं। दाईं ओर की संख्या बड़ी होती है, इसलिए -3, -8 से बड़ा है। निरपेक्ष मान शून्य से दूरी है, अतः |-12| = 12। दो धनात्मक का योग धनात्मक: 6 + 9 = 15। दो ऋणात्मक का योग ऋणात्मक: (-6) + (-9) = -15। भिन्न चिह्न हो तो निरपेक्ष मान घटाते हैं और चिह्न बड़े मान वाला रखते हैं: (-8) + 5 = -3 तथा 12 + (-7) = 5। -15 का पूर्ववर्ती -16 है। अभ्यास से संख्या रेखा पर चलना सहज हो जाता है।
भिन्न किसी पूर्ण के बराबर भागों में से लिए गए भागों को दर्शाती है। अंश लिए गए भाग और हर कुल भाग बताता है। उचित भिन्न में अंश हर से छोटा होता है, जैसे 3/8। अनुचित में अंश बड़ा या बराबर होता है, जैसे 9/4। मिश्रित संख्या 2 1/4, जो 9/4 के बराबर है। तुल्य भिन्न एक ही मान दिखाती हैं: 2/3 = 4/6। जोड़ में पहले समहर बनाते हैं। 1/2 + 1/4 = 2/4 + 1/4 = 3/4। 2/3 + 1/6 = 4/6 + 1/6 = 5/6। 20 का 3/5 भाग 12 है। सरलतम रूप में लिखना उत्तर को साफ बनाता है।
दशमलव भिन्न का वह रूप है जिसका हर 10, 100 या 1000 हो। दशमलव बिंदु एकों को दसवें स्थान से अलग करता है। बिंदु के दाईं ओर पहला अंक दसवाँ और दूसरा सौवाँ स्थान है। 24.65 में 6 का स्थानीय मान 0.6 तथा 5 का 0.05 है। 0.7 = 7/10 और 0.25 = 25/100 = 1/4। तुलना में पहले पूर्ण भाग, फिर दसवाँ स्थान देखते हैं, इसलिए 3.42, 3.24 से बड़ा है। जोड़ते समय बिंदु को बिंदु के नीचे रखते हैं। 0.5 + 0.25 = 0.75। ₹8.50 का अर्थ 8 रुपये 50 पैसे है। दशमलव से नाप सटीक होती है।
आँकड़े तथ्य और संख्याएँ हैं जिन्हें किसी प्रश्न का उत्तर देने के लिए जोड़ा जाता है। पहले जानकारी एकत्र कर सारणी में रखते हैं। टैली में चार खड़ी रेखाओं के बाद पाँचवीं तिरछी रेखा पाँच दर्शाती है। चित्रालेख में प्रत्येक चित्र एक निश्चित संख्या बताता है। यदि एक फूल 10 पौधे हो तो तीन फूल 30 पौधे दर्शाते हैं। पैमाना अवश्य पढ़ना चाहिए। दण्ड आलेख में छड़ की ऊँचाई मान के अनुपात में होती है। यदि एक इकाई दस विद्यार्थी हो तो चार इकाई ऊँची छड़ चालीस विद्यार्थी दिखाती है। दोनों अक्षों पर शीर्षक और पैमाना लिखना आवश्यक है। आलेख से सबसे बड़ा-छोटा मान शीघ्र दिख जाता है।
क्षेत्रमिति परिमाप और क्षेत्रफल नापने का अध्याय है। परिमाप बंद आकृति की सीमा की कुल लंबाई है। क्षेत्रफल बताता है आकृति कितना तल ढकती है। आयत का परिमाप 2 × (लंबाई + चौड़ाई) होता है। लंबाई 8 सेमी और चौड़ाई 5 सेमी हो तो परिमाप 2 × 13 = 26 सेमी तथा क्षेत्रफल 8 × 5 = 40 सेमी²। वर्ग का परिमाप 4 × भुजा और क्षेत्रफल भुजा × भुजा। 9 सेमी भुजा पर परिमाप 36 सेमी और क्षेत्रफल 81 सेमी²। समबाहु त्रिभुज का परिमाप 3 × भुजा: 6 सेमी पर 18 सेमी। परिमाप सेमी में और क्षेत्रफल सेमी² में लिखा जाता है। बाड़ परिमाप से और टाइल क्षेत्रफल से तय होती है।
नियमित बंद आकृति का परिमाप सभी भुजाओं का योग है। प्रत्येक भुजा 4 सेमी के नियमित षट्भुज का परिमाप 6 × 4 = 24 सेमी है। कमरे की लंबाई 12 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर हो तो क्षेत्रफल 84 मीटर²। उसी आयत का परिमाप 2 × (12 + 7) = 38 मीटर, जो झालर की लंबाई बताता है। वर्ग बगीचे की भुजा 10 मीटर हो तो क्षेत्रफल 100 मीटर² और परिमाप 40 मीटर। पहले सब नाप एक इकाई में लाते हैं। 1 मीटर = 100 सेमी, इसलिए 2 मीटर 50 सेमी = 250 सेमी। क्षेत्रफल हमेशा वर्ग इकाई में होता है। बाग की मेड़ परिमाप का और दीवार पर पेंट क्षेत्रफल का उदाहरण है।
बीजगणित में अज्ञात मानों के लिए अक्षर प्रयोग करते हैं। चर का मान बदल सकता है, जैसे x, y, n। अचर स्थिर रहता है, जैसे 2, 7, 15। व्यंजक 3x + 2 में x चर है और 2 अचर है। 5 केवल संख्या है, पर 3x + 2 बीजीय व्यंजक है। समीकरण में बराबर का चिह्न होता है, जैसे x + 7 = 15। दोनों पक्षों से 7 घटाने पर x = 8। 5y = 20 में दोनों पक्ष 5 से भाग देने पर y = 4। 3n + 5 = 20 हो तो 3n = 15, अतः n = 5। जाँच: 3 × 5 + 5 = 20। शब्दों को समीकरण में बदलना बीजगणित का मुख्य उपयोग है।
अनुपात दो राशियों की तुलना भाग द्वारा करता है जब इकाइयाँ समान हों। 12 और 18 का अनुपात 12 : 18 है, जिसे 6 से भाग देकर 2 : 3 लिखा जाता है। अनुपात का क्रम महत्त्वपूर्ण है। समानुपात दो अनुपातों की समानता है। 3 : 4 = 9 : 12 क्योंकि 3 × 12 = 4 × 9 = 36। यदि 3 : 4 = 9 : x हो तो 3x = 36, अतः x = 12। एकक विधि में पहले एक इकाई का मान निकालते हैं। पाँच पेन 40 रुपये के हों तो एक पेन 8 रुपये का है। चार किलोग्राम चावल 120 रुपये का हो तो सात किलोग्राम 210 रुपये के हैं। क्रॉस-गुणन से समानुपात जाँचा जाता है।
सममिति संतुलन का गुण है। यदि आकृति को एक रेखा से बाँटने पर दोनों भाग ठीक बैठ जाएँ, तो वह सममिति रेखा है। वर्ग की चार सममिति रेखाएँ होती हैं: दो विकर्ण और दो मध्य रेखाएँ। आयत की केवल दो सममिति रेखाएँ होती हैं जो भुजाओं के मध्य से जाती हैं। समबाहु त्रिभुज की तीन सममिति रेखाएँ होती हैं, प्रत्येक शीर्ष से विपरीत भुजा के मध्य तक। समद्विबाहु त्रिभुज की एक सममिति रेखा होती है। वृत्त की अनंत सममिति रेखाएँ होती हैं क्योंकि प्रत्येक व्यास उसे दो बराबर भागों में बाँटता है। प्रकृति में पत्ती, तितली और फूल सममिति दिखाते हैं। कला और वास्तुकला में सममिति सुंदरता बढ़ाती है।
प्रायोगिक ज्यामिति में आकृतियाँ यंत्रों से सटीक बनाते हैं। मुख्य यंत्र पैमाना, परकार, चाँदा और पेंसिल हैं। दिए गए रेखाखंड के बराबर दूसरा खंड बनाने के लिए परकार में वही लंबाई सेट कर किरण पर चाप काटते हैं। लंब समद्विभाजक के लिए दोनों सिरों को केंद्र मानकर आधी से अधिक त्रिज्या के चाप खींचते हैं। प्रतिच्छेद बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा खंड को समकोण पर दो बराबर भागों में बाँटती है। कोण की नकल परकार से चाप काटकर की जाती है। चाँदे से 60 डिग्री या 90 डिग्री का कोण भी खींचा जा सकता है। वृत्त में परकार की एक नोक केंद्र पर रहती है; यह दूरी त्रिज्या है। साफ रेखा और सही नामकरण रचना को जाँचने योग्य बनाते हैं।
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